जौहर,केसरिया,शाका और सती || भारत का इतिहास

जौहर,केसरिया,शाका और सती

जौहर – यह राजस्थान की प्राचीन प्रथा है, महिलाएं अपने स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर देती थी। जौहर केसरिया शाका सती

केसरिया – जब वीरों को लगता था कि वे युद्ध नही जीत पाएंगे तब मरने-मारने की भावना लेकर सिर पर केसरिया धारण करते थे और युद्ध में उतर जाते थे।

शाका – जब जौहर और केसरिया साथ में हो तब उसे साका कहा जाता है।।

सती – जब वीरांगना अपने पति की मृत्यु के बाद अपनी मृत पति के साथ चिता में जलकर अमर हो जाती है, उसे सती कहते है

 

प्रमुख जौहर और शाके

रणथंभौर का शाका

यह राजस्थान का पहला शाका है, इस समय रणथंभौर के शासक हम्मीरदेव चौहान थे और 1301 में अलाउद्दीन ख़िलजी के आक्रमण के समय यह हुआ। इस शाके में योद्धाओं ने केसरिया किया व हम्मीरदेव चौहान की पत्नी रंगदेवी के नेतृत्व में जौहर हुआ। ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह राजस्थान का पहला जल जौहर भी था। हम्मीरदेव चौहान की पुत्री देवल/पद्मा ने पदमला तालाब में कूदकर जल जौहर किया।

चित्तौड़गढ़ का पहला शाका (1303)

रावल रतनसिंह vs अलाउद्दीन खिलजी
रावल रतनसिंह के नेतृत्व में केसरिया व रानी पद्मिनी के नेतृत्व में जौहर होता है।
इस युद्ध में गोरा व बादल ने प्रमुख भूमिका निभाई थी।

चित्तौड़गढ़ का दूसरा शाका (1534-1535)

बहादुर शाह (गुजरात) vs विक्रमादित्य
देवलिया के बाघसिंह के नेतृत्व में केसरिया व रानी कर्मावती के नेतृत्व में जौहर होता है।
(कर्मावती हुमायूँ को राखी भेजती है लेकिन हुमायूँ समय पर नही पहुँच पाता है लेकिन बाद में हुमायूं दुबारा विक्रमादित्य को शासन दिलाने में मदद करता है।)

चित्तौड़गढ़ का तीसरा शाका (1567-1568)

अकबर vs राणा उदयसिंह
राणा उदयसिंह जयमल व पत्ता सिसोदिया को चित्तौड़गढ़ दुर्ग सम्भलाकर उदयपुर आ जाते है।
अतः जयमल व पत्ता के नेतृत्व में केसरिया व फूल कँवर के नेतृत्व में जौहर होता है।

सिवाना का पहला शाका(1308)

अलाउद्दीन vs सातलदेव

सिवाना का दूसरा शाका(1583)
अकबर vs कल्ला रायमलोत
कल्ला रायमलोत जी के नेतृत्व में केसरिया व हाड़ी रानी के नेतृत्व में जौहर होता है।

जैसलमेर के ढाई साके

1.अलाउद्दीन vs मूलराज (1299 या 1313)
वास्तविकता से देखे तो यह राजस्थान का पहला शाका था लेकिन कर्नल जेम्स टॉड में रणथंभौर के शाके को पहला शाका कहाँ है।
यहां मूलराज के नेतृत्व में केसरिया होता है।

2. फ़िरोजशाह तुगलक vs रावल दूदा
रावल दूदा के नेतृत्व में केसरिया व महिलाओं द्वारा जौहर किया जाता है।

3.लूणकरण vs अमीर अली( 1550 )
यह अर्द्ध साके नाम से जाना जाता है क्योंकि इसमें जौहर नही होता है लेकिन केसरिया होता है।
अमीर अली लूणकरण का दोस्त था।
इस युद्ध में लूणकरण और अमीर अली दोनों ही मारे जाते है।

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