अलाउद्दीन खिलजी  | मध्यकालीन भारत का इतिहास || भारत का इतिहास

अलाउद्दीन खिलजी 

प्रिय पाठको आज हम मध्यकालीन भारत के खिलजी वंश के अलाउद्दीन खिलजी के बारें में जानेंगे. इससे जुड़े वे सभी प्रश्न जो प्रतियोगी परीक्षाओ के लिए अति महत्वपूर्ण है 

अलाउद्दीन खिलजी जलालुद्दीन ख़िलजी का भतीजा व दामाद था। अलाउद्दीन बहुत ही महत्वाकांक्षी था और जैसे ही उसे गद्दी हथियाने का मौका मिला उसने कोई भी चूक ना करते हुए जलालुद्दीन खिलजी की सम्पूर्ण परिवार सहित हत्या कर गद्दी हथिया ली।

अलाउद्दीन खिलजी ने स्वयं को सुल्तान घोषित करते हुए ‘सिकन्दर-ए-सानी‘ अथार्त ‘द्वितीय सिकन्दर’ की उपाधि धारण की। अलाउद्दीन का 1296 में दिल्ली में राज्याभिषेक हुआ।

अलाउद्दीन खिलजी ने ‘खुद को यामिन-उल-खिलाफत नासिरी-अमीर-उल-मुमनि‘ कहा।

अलाउद्दीन ने अमीरों का दमन किया और साधारण लोगों को उच्च पदों पर बिठाया।

अलाउद्दीन के समय न्याय व्यवस्था कठोर थी, संदेह होने पर भी मृत्यु दंड दे दिया जाता था। सर्वोच्च न्यायिक शक्ति सुल्तान में निहित होती थी। अलाउद्दीन न्याय व्यवस्था को लेकर रिश्तेदारों को भी नही बख्शता था।

अलाउद्दीन ने स्थाई सेना की व्यवस्था की, जो हमेशा राजधानी में तैनात रहती थी। सैनिकों की भर्ती योग्यता के आधार पर होती थी।

सैनिकों को नगद वेतन दिया जाने लगा। सैनिकों को घोडे व हथियार राज्य की तरफ से ही मिलते थे।

अलाउद्दीन ने घोड़ा दागने की प्रथा शुरू की।

अलाउद्दीन ने जागीर प्रथा का भी अंत किया।

अलाउद्दीन ने करों में भी वृद्धि की। जहाँ हिंदुओ को भूमि कर 50% व मुस्लिमों को 25% देना होता था।

अलाउद्दीन ने गैर मुसलमानों पर जजिया कर, भूमि कर, गृहकर, चारागाह कर जैसे कर लगा रखे थे।

अलाउद्दीन ने बाजार नियंत्रण भी बखूबी निभाया। और सभी आवश्यक वस्तुओं का मूल्य कम कर दिया। और एक निश्चित मूल्य तय कर दिया।

अलाउद्दीन ख़िलजी को ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली का जनक कहा जाता है।

 

अलाउद्दीन खिलजी के प्रमुख अभियान

अलाउद्दीन की गुजरात विजय(1298-1299) के समय गुजरात का शासक रायकर्ण था, रायकर्ण ने पराजय के बाद देवगिरी के शासक ‘ रामचंद्र देव‘ के शरण ली। अलाउद्दीन ने गुजरात विजय के बाद वहां के मंदिरों को लूटा जिसमें सोमनाथ का मंदिर भी शामिल था।

इस आक्रमण के समय नुसरत खाँ ने खम्भात बंदरगाह से एक हिन्दू किन्नर मलिक काफूर को खरीदा, जो कि बाद में जाकर अलाउद्दीन के दक्षिण अभियानों का प्रमुख सेनापति बना। मलिक काफूर को ‘हजार दिनारी‘ भी कहा जाता है।

अलाउद्दीन के रणथंभौर के आक्रमण के समय रणथंभौर का शासक ‘हम्मीरदेव चौहान‘ था। अलाउद्दीन ने रणथम्भौर आक्रमण के लिए उलूग खाँ और नुसरत खाँ को भेजा लेकिन एक वर्ष की कोशिश के बाद भी सफलता ना मिली लेकिन एक विश्वासघाती हम्मीरदेव का प्रधानमंत्री रणमल सुल्तान से जा मिला। जिसके कारण अलाउद्दीन ने 1301 में रणथम्भौर पर विजय हासिल की।

इस युद्ध में रणथंभौर के शासक ‘वीर हम्मीरदेव चौहान‘ ने वीरगति प्राप्त की और हम्मीरदेव की रानी रंग देवी ने सभी महिलाओं के साथ जौहर किया। यह राजस्थान का एकमात्र जल जौहर है। और राजस्थान का पहला शाका।

अलाउद्दीन खिलजी ने 1303 में चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण किया और चित्तौड़गढ़ का नाम बदलकर अपने बेटे खिज्र खाँ के नाम पर ‘खिज्राबाद’ रख दिया। इस आक्रमण में राणा रतन सिंह जी ने केसरिया किया व रानी पद्मिनी के नेतृत्व में जौहर हुआ।

इस अभियान में अलाउद्दीन खिलजी के साथ अमीर खुसरो  था।

1303 में काकतीय शासकों की सेना ने अलाउद्दीन खिलजी को वारंगल में परास्त किया था।

अलाउद्दीन ने 1305 में मालवा पर विजय हासिल की। अलाउद्दीन ने मुल्तान के सूबेदार आइन-उल-मुल्क को मालवा पर आक्रमण के लिए भेजा था।

1308 में अलाउद्दीन ने मारवाड़ पर विजय हासिल की और कमालुद्दीन गुर्ग को मारवाड़ का शासक बनाया। उस समय मारवाड़ का शासक शीतलदेव परमार था।

1311 में अलाउद्दीन ने कान्हड़देव को परास्त कर जालौर पर विजय हासिल की।

अलाउद्दीन खिलजी ने दक्षिण भारत के अभियानों का नेतृत्व मलिक काफूर को सौंपा था। काफूर ने 1307-1308 में देवगिरी के शासक रामचंद्रदेव को पराजित किया। अलाउद्दीन ने रामचंद्र देव को ‘राय रायन’ की उपाधि दी। और राज्य वापस कर दिया। इसका फायदा अलाउद्दीन को वारंगल(तेलंगाना) विजय पर हुआ। इस अभियान में वारंगल के शासक काकतीय वंश के प्रताप रुद्रदेव को हराने के लिए काफूर का साथ रामचंद्र देव ने दिया। इस समय ही प्रताप रुद्रदेव ने प्रसिद्ध हीरा मलिक काफूर को दिया था।

मलिक काफूर ने 1311 में गृहयुद्ध का फायदा उठाते हुए पांड्य राज्य पर अधिकार कर लिया।

देवगिरी के शासक रामचन्द्र देव की मृत्यु के बाद रामचन्द्र देव के पुत्र शंकरदेव ने बगावत कर दी और अलाउद्दीन को कर देने से मना कर दिया। अतः 1313 में मलिक ने दुबारा देवगिरी पर आक्रमण किया और जीत हासिल की और काफूर ने कई मंदिरों और नगरों को लूटा ।

अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु 1316 में हो गयी।

शेर शाह सूरी

नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ का जीवन परिचय एवम् महत्वपूर्ण प्रश्न

मुग़ल वंश का संस्थापक बाबर

मध्यकालीन इतिहास से सम्बंधित प्रश्न

Tagsमलिक काफूर, खिलजी वंश pdf, खिलजी वंश से संबंधित प्रश्न, रत्नसिंह, मुबारक खिलजी, अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियंत्रण व्यवस्था, तुगलक वंश, रानी पद्मावती का जौहर, रियल पद्मावती फोटो, पद्मिनी मूवी, अलाउद्दीन खिलजी के पिता का नाम, अलाउद्दीन खिलजी के आर्थिक सुधार, पद्मावती कौन थी, हुलिया प्रथा क्या है, रानी पद्मावती कहानी, रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी की कहानी,

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: