लॉर्ड माउंटबेटन योजना : 1947 || भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम कब बना था

लॉर्ड माउंटबेटन योजना : 1947

20 फरवरी 1947 ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने हाउस ऑफ कॉमन्स में यह घोषणा की कि अंग्रेज 30 जून 1948 तक भारत को सत्ता सौंप देंगे। एटली ने लॉर्ड वैवेल के स्थान पर लॉर्ड माउंटबेटन को भारत का नया वायसराय नियुक्त किया। लॉर्ड वैवेल ने भी एक ‘ ब्रेकडाउन प्लान ’ के तहत 31 मार्च, 1947 तक अंग्रेजों को भारत छोड़ने का सुझाव दिया था। 22 मार्च, 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन भारत के 34वें व अंतिम गवर्नर जनरल के रूप में भारत को अतिशीघ्र स्वतंत्रता देने के उद्देश्य से आये। माउंटबेटन ने 15 अगस्त,1947 को भारतीयों को सत्ता सौंपने का दिन निर्धारित किया।
दिल्ली पहुंचे ही माउंटबेटन ने आजादी के फॉर्मूले पर सभी पक्षों से बातचीत शुरू की एक तरफ कांग्रेस नेता विभाजन के सख्त खिलाफ थे वही मुस्लिम लीग पाकिस्तान मांग से पीछे हटने को तैयार नही थी, इस मुद्दे पर देश के विभिन्न हिस्सों में दंगे भी भड़क उठे थे, हालात बदतर हो गए थे कि कांग्रेस के अंदर भी विभाजन को न टाली जा सकने वाली सच्चाई के तौर पर देखा गया।

माउंटबेटन योजना

03 जून,1947 को माउंटबेटन ने भारत के विभाजन के साथ सत्ता हस्तांतरण की योजना प्रस्तुत की। इसे माउंटबेटन योजना या तीन जून को प्रस्तावित होने के कारण इसे तीन जून की योजना भी कहा जाता है। तीन जून की घोषणा ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली ने हाऊस ऑफ कॉमन्स में 03 जून ,1947 को लॉर्ड माउंटबेटन के नेतृत्व में आजादी से पहले विभाजन की रूपरेखा प्रस्तुत की जिसके अनुसार माउंटबेटन योजना के मुख्य प्रारूप निम्न प्रकार थे

1. पंजाब बंगाल में प्रांतीय विधानमंडल के दो भाग होंगे एक में मुस्लिम बहुल जिलों के व दूसरे में बाकी जिलों के प्रतिनिधि होंगे। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को यह तय करना था कि वें भारत में रहेंगे या पाकिस्तान में शामिल होंगे। विभाजन की स्थिति में दो राज्यों व दो संविधान सभाओं का निर्माण किया जाएगा। पंजाब ,बंगाल व असम में विभाजन हेतु सीमा आयोग का गठन किया जाएगा।

2. उत्तर पश्चिमी सीमांत प्रांत व असम के सिलहट जिले में जनमत संग्रह द्वारा यह तय होना था कि वें पाकिस्तान में मिलना चाहते हैं या नहीं।

3. सिंधु व बलूचिस्तान मैं प्रांतीय विधानमंडल को यह निर्णय सीधा लेना था।

4. देशी रियासतों को स्वतंत्र रहने का अधिकार नहीं दिया गया उन्हें भारत या पाकिस्तान में से एक राज्य में शामिल हो रहा था किंतु हैदराबाद की पाकिस्तान में शामिल होने की मांग अस्वीकार कर दी गई क्योंकि उसके लिए भौगोलिक दशाएं अनुकूल नहीं थी।

5. 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान को डोमिनियन स्टेटस के आधार पर सत्ता का हस्तांतरण किया जाएगा उन्हें इस भारत की स्वतंत्रता होगी कि वह चाहे तो राष्ट्रमंडल को छोड़ सकते हैं।

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डोमिनियन स्टेट्स के आधार पर भारत व पाकिस्तान की दो केंद्रीय सरकारों को सत्ता हस्तांतरित करने का सुझाव माउंटबेटन को सरदार पटेल व वी. पी. मेनन ने दिया। मौलाना आजाद और पुरषोत्तम दास टंडन ने इस योजना का विरोध किया। कांग्रेस कार्यकारिणी समिति ने 12 जून को तथा कांग्रेस महासमिति ने 14–15 जून,1947 को दिल्ली में हुई बैठक में माउंटबेटन योजना की पुष्टि कर दी। कांग्रेस महासमिति बैठक में गोविंद वल्लभ पंत ने देश के विभाजन की माउंटबेटन योजना को स्वीकार करने का प्रस्ताव पेश किया था। गांधीजी ने कहा था कि “ यदि सारा भारत आग की लपटों में घिर जाए तो भी पाकिस्तान नही बन सकता। विभाजन मेंरे मृत शरीर पर होगा, गांधीजी ने सबसे अंत में विभाजन स्वीकार किया। खान अब्दुल गफ्फार खान जिन्हे सीमांत गांधी के नाम से जाना जाता है ने विभाजन का विरोध किया और कहा “ कांग्रेस नेतृत्व ने उनके आंदोलन को भेड़ियों के आगे फेंक दिया ” ।
माउंटबेटन योजना के तहत 14 अगस्त ,1947 की रात पाकिस्तान को स्वतंत्रता दी गई, जबकि उसके अगले दिन यानी 15 अगस्त को भारत आजाद हुआ, आजादी के दो दिन बाद 17 अगस्त को रेडक्लिफ द्वारा तैयार भारत और पाकिस्तान का मानचित्र जारी किया गया।

कैबिनेट मिशन योजना क्या थी

सुभाष चन्द्र बोस और आजाद हिन्द फौज

डॉ. लतीफ योजना , राजगोपालाचारी योजना एवं लियाकत–देसाई फार्मूला

क्रिप्स मिशन योजना क्या थी?

मुस्लिम लीग और पाकिस्तान की माँग

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Lokesh Tanwar

अभी कुछ ख़ास है नहीं लिखने के लिए, पर एक दिन जरुर होगा....

4 thoughts on “लॉर्ड माउंटबेटन योजना : 1947 || भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम कब बना था

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