कैबिनेट मिशन योजना क्या थी || केबिनेट मिशन

केबिनेट मिशन (मंत्रिमंडल मिशन) : 1946

कैबिनेट मिशन योजना क्या थी

फरवरी ,1946 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली ने हाउस ऑफ कॉमन्स में यह घोषणा कर दी की भारतीयों को स्वतंत्र होने का पूर्ण अधिकार है। इसके लिए एटली भारत में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय संसदीय दल भेजने का निर्णय किया।इस समिति में – सर स्टैफोर्ड क्रिप्स ( व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष ) , लॉर्ड पैथिक लॉरेंस (भारत सचिव) और ए.वी. एलेक्जेंडर (नौसेना मंत्री) थे। इसका कार्य भारत को शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण के उपाय व संविधान तैयार करने की कार्यप्रणाली तय करना था।कैबिनेट मिशन 23 मार्च 1946 को भारत आया। कैबिनेट मिशन में समझौते के प्रयास में शिमला में त्रिस्तरीय सम्मेलन जो कि 5 से 11 मई 1946 को बुलाया गया था त्रिस्तरीय सम्मेलन में कांग्रेस की ओर से मौलाना आजाद जो इस समय कांग्रेस के अध्यक्ष थे। जवाहरलाल नेहरू वह सरदार पटेल, मुस्लिम लीग की ओर से मोहम्मद अली जिन्ना, नवाब इस्माइल खान तथा लियाकत अली खान सरकार की ओर से गवर्नर जनरल वह मिशन के तीनों सदस्य शामिल थे।

सम्मेलन में कोई सर्व सम्मत समाधान नहीं हुआ क्योंकि मुस्लिम लीग किसी भी दशा में पाकिस्तान की मांग छोड़ने को तैयार नहीं थी, जबकि न केवल कांग्रेस बल्कि मंत्रिमंडल मिशन के सदस्य भी लीग कि पाकिस्तान की मांग से सहमत नहीं थी। केबिनेट मिशन ने 16 मई 1946 को अपने प्रस्ताव की घोषणा की, यह घोषणाएं मुख्यतः चार भागों में विभाजित की जा सकती है

1. ब्रिटिश प्रांतों और देशी राज्यों को मिलाकर एक भारतीय संघ का निर्माण किया जाएगा।भारतीय संघ के अधीन परराष्ट्र नीति, प्रतिरक्षा और संचार व्यवस्था रहेगी जिसके लिए आवश्यक कोष भी संघ को ही जुटाना होगा।

2. संघ की कार्यपालिका और विधान मंडल होगा जिसमें ब्रिटिश प्रांतों और देसी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, इसके अलावा सभी विषय सरकार के अधीन रखे जाएंगे।

3. प्रांतों को यह अधिकार दिया गया कि वह तीन समूहों– समूह (क) में बंबई, मद्रास, मध्यप्रान्त, संयुक्त प्रांत एवं उड़ीसा नामक हिंदू बहुसंख्यक प्रांत शामिल थे, समूह (ख) में पंजाब, उतर पश्चिमी सीमांत प्रांत एवं सिंध के मुस्लिम बहुल प्रांत थे जबकि समूह (ग) में बंगाल व असम के मुस्लिम बहुसंख्यक प्रांत थे प्रत्येक समूह को अधिकार दिया गया की वह अपने विषय के संबंध में निर्णय लें और शेष विषय प्रांतीय मंत्रिमंडल को सौंप दें।

4. देसी राज्यों के द्वारा जो विशेष संघ को नहीं सौंपे जाएंगे उन पर देसी रियासतों का ही अधिकार होगा।

5. संविधान के निर्माण के पश्चात ब्रिटिश सरकार देसी राज्यों को सार्वभौम संप्रभुता का अधिकार प्रदान कर देगी। भारतीय संघ में शामिल होने या स्वतंत्र रहने का निर्णय देशी रियासतों के शासक स्वयं करेंगे।

6. योजनाओं के क्रियान्वित होने के 10 वर्ष पश्चात या प्रत्येक 10 वर्ष पर प्रांतीय विधानमंडल बहुमत द्वारा संविधान की धाराओं पर पुनर्विचार कर सकता है।

केबिनेट मिशन में संविधान निर्माण संबंधी प्रावधान

1. प्रति दस लाख जनसंख्या पर एक सदस्य का निर्वाचन होगा।
2. प्रांतों को संविधान सभा में जनसंख्या के आधार पर दिया जाएगा।
3. अल्पसंख्यक वर्गो को आबादी से अधिक स्थान देने की प्रथा समाप्त हो जायेगी।
4. देशी रियासतों को भी जनसंख्या के आधार पर हो प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
5. संविधान सभा की बैठक दिल्ली में होगी और प्रारंभिक बैठक में अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों का चुनाव कर लिया जाएगा।
6. प्रांतों के लिए अलग संविधान की व्यवस्था भी योजना के अंतर्गत थी, प्रत्येक समूह अपने संविधान के संबंध में तथा संघ में रहने का निर्णय करेगा।
7. केंद्र में एक अस्थाई सरकार की स्थापना होगी और उसमे भारत के सभी प्रमुख दलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।
8. इंगलैंड भारत को सत्ता सौंप देगा इस प्रक्रिया में जो भी विवाद उत्पन्न हो उनके निपटान के लिए भारत और इंग्लैंड के मध्य एक संधि होगी।

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अंततः 14 जून,1946 को कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। हिंदू महासभा और साम्यवादी दल ने इसकी कटु आलोचना की और 22 जुलाई ,1946 में वायसराय ने अंतरिम सरकार के गठन का प्रस्ताव रखा।अंतरिम सरकार की स्थापना के प्रश्न पर कांग्रेस और मुस्लिम लीग के मध्य मतभेद हो गए। 12 अगस्त,1946 को वायसराय ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को अंतरिम सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। वायसराय के इस कदम के विरोध में लीग ने 16 अगस्त,1946 को सीधी कार्यवाही दिवस की शुरुआत की।इस कार्यवाही का उद्देश्य सांप्रदायिक दंगे फैला कर यह सिद्ध करना कि हिंदू मुस्लिम एक साथ नही रह सकते। मौलाना आजाद ने 16 अगस्त को भारतीय इतिहास का काला दिवस बताया।

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Lokesh Tanwar

अभी कुछ ख़ास है नहीं लिखने के लिए, पर एक दिन जरुर होगा....

4 thoughts on “कैबिनेट मिशन योजना क्या थी || केबिनेट मिशन

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