निति निदेशक तत्व || अनुच्छेद 40 से अनुच्छेद 51

निति निदेशक तत्व

अनुच्छेद 40 से अनुच्छेद 51

अनुच्छेद 40

अनुच्छेद 40 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि राज्य प्राथ पंचायतों के गठन के लिए कदम उठायेगा और इन्हें उतने अधिकार और शक्ति प्रदान करेगा, जितने से वह एक स्वायत्त शासन की। इकाइयों के रूप में कार्य कर सकें। ध्यातव्य है कि इस निवेश के क्रियान्वयन में संविधान का 73वाँ एवं 74वाँ संशोधन अधिनियम, 1992 को पारित करके भाग 9 एवं 9क के तहत क्रमशः पंचायतों और नगर पालिकाओं के गठन, निर्वाचन, शक्तियों तथा उत्तरदायित्वों का प्रावधान किया गया है।

अनुच्छेद-41

राज्य अपने आर्थिक साधनों के अनुसार और विकास की सीमाओं के भीतर यह प्रयास करेगा कि सभी नागरिक अपनी योग्यता के अनुसार रोजगार व शिक्षा पा सकें एवं बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी और असमर्थता आदि दशाओं में सार्वजनिक सहायता प्राप्त कर सकें। –

अनुच्छेद-42

राज्य ऐसा प्रयत्न करेगा कि व्यक्तियों को अपनी अनुकूल और मानवोचित अवस्थाओं में ही कार्य करना पड़े तथा स्त्रियों को प्रसूति सहायता के लिए उपबन्ध करेगा।

अनुच्छेद – 43

राज्य इस बात का प्रयत्न करेगा कि कृषि और उद्योग में लगे हुए सभी मजदूरों को अपने जीवन-निर्वाह के लिए यथोचित वेतन मिल सके, उनका जीवन स्तर ऊपर उठ सके, वे अवकाश के समय का उचित उपयोग कर सकें तथा उन्हें सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति का अवसर प्राप्त हो सके। ज्ञातव्य है कि ‘मनरेगा’ राज्य के इसी संवैधानिक लक्ष्य की पूर्ति की दिशा में केन्द्र प्रायोजित एक कार्यक्रम है।* राज्य का यह भी प्रयास होगा कि गाँवों में व्यक्तिगत अथवा सहकारी आधार पर कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन दे।

अनुच्छेद 43 क
राज्य उचित व्यवस्थापन या अन्य प्रकार से औद्योगिक संस्थानो के प्रबन्ध में कर्मचारियों को भागीदार बनाने के लिए कदम उठायेगा।
अनुच्छेद 43क में वर्णित निदेशक तत्व 42 वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया है।

अनुच्छेद 43ख
अनुच्छेद 43ख के तहत राज्यों को यह निर्देश दिया गया है कि वह सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वतंत्र संचालन, लोकतंत्रिक नियंत्रण तथा व्यवसायिक प्रबन्धन को प्रोत्साहित करें। ज्ञातव्य है। कि यह अनु. 97वें संविधान संशोधन अधि. 2011 द्वारा संविधान में जोड़ा गया है।

 

अनुच्छेद 44

अनुच्छेद 44 के तहत यह उपबन्धित किया गया है कि राज्य, भारत के समस्त राज्य क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code) प्राप्त कराने का प्रयास करेगा। ज्ञातव्य है कि सरला मुदगल बनाम भारत संघ (1995) के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार से अनु. 44पर नया दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया था और कहा था कि ऐसा करना पीड़ित व्यक्ति की रक्षा तथा राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता की अभिवृद्धि दोनों ही दृष्टि से आवश्यक है।

अनुच्छेद 45

मूल संविधान के अनुच्छेद 45 में कहा गया था कि “राज्य 14 वर्ष तक के बालकों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था करेगा।” 86वें संविधान संशोधन (2002) द्वारा इस निदेशक तत्व को ‘स्तवन्त्रता के अधिकार’ के अन्तर्गत मूल अधिकार की स्थिति प्रदान कर दी गई है तथा इसके स्थान पर नया अनुच्छेद प्रतिस्थापित गया है जो इस प्रकार है- “राज्य प्रारम्भिक बाल्यावस्था में देखभाल और बच्चों की शिक्षा के लिए प्रयास करेगा।”

 

अनुच्छेद- 46

राज्य जनता के दुर्बल वर्गों, विशेषतया अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजतियों के शिक्षा तथा अर्थ सम्बन्धी हितों की, विशेष सावधानी से उन्नति करेगा और सामाजिक अन्याय तथा सभी प्रकार के शोषण से उनकी रक्षा करेगा।

 

अनुच्छेद-47

राज्य लोगों के जीवन स्तर और स्वास्थ्य को सुधारने के लिए प्रयत्न करेगा तथा इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए औषधि में प्रयोग किये जाने के अतिरिक्त स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक द्रव्यों तथा अन्य पदार्थों के सेवन पर प्रतिबन्ध लगायेगा।

 

अनुच्छेद-48

राज्य, कृषि और पशुपाल को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने का प्रयास करेगा तथा विशेष रूप से दुधारु और वाहक पशुओं की अन्य  नस्लों के संरक्षण और सुधार के लिए तथा उनका बध रोकने के लिए के कदम उठायेगा

अनुच्छेद-48 (क)
राज्य देश के पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन का तथा वन और वन्य जीवों की सुरक्षा का प्रयास करेगा।

अनुच्छेद-49

अनुच्छेद-49 के तहत् राज्य प्रत्येक स्मारक, कलात्मक या ऐतिहासिक रुचि के स्थानों को, जिसे संसद ने राष्ट्रीय महत्व का घोषित कर दिया हो, रक्षा करने का प्रयत्न करेगा।

अनुच्छेद 50

अनुच्छेद 50 के तहत न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक करने हेतु राज्यों को निदेश दिया गया है। इसके अनुसार राज्य की लोक सेवाओं में, न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक् करने के लिए राज्य कदम उठाएगा।

अनुच्छेद 51

अनुच्छेद 51, अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा तथा भारत की विदेश नीति सम्बन्धी निदेशक तत्व के बारे में है
इसके अनुसार राज्य अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में अधोलिखित आदर्शों को प्राप्त करने के लिए कार्य करेगा।
यथा
अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा में वृद्धि,
राष्ट्रों के बीच न्याय और सम्मानपूर्ण सम्बन्ध बनाये रखने
राष्ट्रों के आपसी व्यवहार में अन्तर्राष्ट्रीय कानून और सन्धियों के प्रति आदर का भाव बढ़ाने तथा
अन्तर्राष्ट्रीय झगड़ों को मध्यस्थता द्वारा सुलझाने को प्रोत्साहित करने के लिए।

 

अंतरिम सरकार का गठन कब हुआ ?

लॉर्ड माउंटबेटन योजना : 1947

कैबिनेट मिशन योजना क्या थी

सुभाष चन्द्र बोस और आजाद हिन्द फौज

 

 

Lokesh Tanwar

अभी कुछ ख़ास है नहीं लिखने के लिए, पर एक दिन जरुर होगा....

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